ट्रेन की चपेट में आने से श्रमिक की मौत के बाद लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। उन्होंने कंपनी के गेट पर शव रखकर तीन घंटे तक प्रदर्शन किया। हंगामा बढ़ने पर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल पहुंचे। उनके हस्तक्षेप पर कंपनी प्रबंधन की ओर से मृतक के बेटे को शैक्षिक योग्यता के आधार पर नौकरी व अन्य सुविधाएं देने का आश्वासन दिया गया। जिसके बाद हंगामा शांत हुआ और लोग शव लेकर वापस लौटे। इंदिरा कॉलोनी निवासी 55 वर्षीय सुरेश प्रसाद पुत्र बाजी लाल सिडकुल की एक कंपनी में काम करते थे। सोमवार को वह कंपनी जा रहे थे। काठगोदाम से दिल्ली जा रही संपर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आ गए और हादसे में उनकी मौत हो गई। मृतक के परिजनों का आरोप था कि सुरेश पिछले चार दिनों से बीमार थे।
सोमवार को वह काम पर गए, लेकिन कंपनी ने नो एंट्री की बात कहकर नौ बजे आने को कहा। घर आकर जब वह दोबारा कंपनी जाने को निकले तो ट्रेन की चपेट में आकर मौत हो गई। मंगलवार को कंपनी प्रबंधन पर गैर जिम्मेदाराना व्यवहार का आरोप लगा सामाजिक कार्यकर्ता सुशील गाबा कामगारों व मृतक के परिजनों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। 10:30 बजे पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद मृतक सुरेश प्रसाद का शव लेकर कंपनी के बाहर पहुंच गए। गेट पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने मांग की कि मृतक के बेटे को नियमित नौकरी व 20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। प्रदर्शन की सूचना पर दोपहर दो बजे पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल पहुंचे। भारी पुलिस बल के बीच ठुकराल व गाबा ने प्रबंधन से वार्ता की।ठुकराल ने बताया कि प्लांट हेड सुनील कुमार पीपल व एचआर हेड सुरेश गुप्ता ने मृतक के पुत्र को नियमानुसार नौकरी देने व अन्य पॉलिसी सुविधा का लाभ देने का आश्वासन दिया। इधर, समाजसेवी गाबा ने व्यक्तिगत रूप से 20 हजार का चेक मृतक के परिवार को सौंपा। यहां सिडकुल श्रमिक मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी, जगमोहन डसीला, हीरा लाल राठौर, हेम दुर्गापाल, हैप्पी रंधावा, केरू मंडल, अशोक यादव, ललित बिष्ट, संतोष गुप्ता, उमाशंकर यादव, ललित मटियाली आदि मौजूद रहे।
कंपनी के बाहर तैनात रही पुलिस-पीएसी
लोगों के हंगामे और आक्रोश को देख पुलिस अलर्ट रही। कंपनी के बाहर भारी मात्रा में पुलिस-पीएसी को तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने कई बार गेट से अंदर जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने रोक दिया।






