पांच नगर निकायों में चुनाव का इंतजार है। शहरी विकास विभाग के स्तर से परिसीमन समेत सभी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं। निर्वाचन आयोग को अब इस पर फैसला लेना है। हालांकि इनमें से दो निकायों का मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। नरेंद्रनगर नगर पालिका का चुनाव वर्ष 2003 में होना था। परिसीमन से पहले सरकार ने एक गांव को पहले तो इसमें शामिल किया और फिर हटा दिया था।लिहाजा, समय से परिसीमन न होने के कारण यहां पिछले साल चुनाव नहीं हो पाए थे। अब परिसीमन व ओबीसी आरक्षण के सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसी प्रकार, वर्ष 2018 में किच्छा नगर पालिका के विस्तार के समय सिरौली कलां, बंडिया, देवरिया और आजाद नगर को इसमें शामिल किया गया था। सिरौली कलां में तीन वार्ड (18, 19, 20) और वार्ड 17 के कुछ हिस्से बनाए गए थे। बाद में, 2024 में एक नोटिफिकेशन के जरिए सिरौली कलां को पालिका से अलग कर फिर से रेवेन्यू विलेज बनाने का प्रयास किया गया।
सिरौली कलां को सरकार ने अलग से नगर पालिका बना दिया
स्थानीय निवासियों (मोहम्मद यासीन और अन्य) ने इसके विरोध में हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें तर्क दिया गया कि पिछले छह वर्षों से यह हिस्सा नगर पालिका का है और यहां लगभग पांच करोड़ रुपये के विकास कार्य हो चुके हैं। मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सिरौली कलां को पालिका से बाहर करने वाले तीन सितंबर 2024 के नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी। हालांकि सिरौली कलां को सरकार ने अलग से नगर पालिका बना दिया है।अभी दोनों का चुनाव भी लटका हुआ है। इसी प्रकार, सरकार ने ऊधमसिंह नगर में गढ़ी नेगी और चंपावत में पाटी नगर पंचायत बनाए थे। इनकी भी परिसीमन आदि की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब राज्य निर्वाचन आयोग को इनका चुनाव तय करना है। राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार का कहना है कि दो निकायों किच्छा-सिरौली कलां का मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।






