प्रदेश के 21 शहरों में पांच साल पहले ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) की योजनाएं बनीं। उनके लिए केंद्र से बजट भी आया, लेकिन वह शुरू ही नहीं हो पाईं। नतीजतन शहरी विकास विभाग ने इन्हें बंद कर दिया है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की जगह अब कचरा ढोने वाले वाहनों की खरीद की जा रही है।21 शहरों में प्रस्तावित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं को विभाग ने बंद कर दिया। वन भूमि, राजस्व भूमि की उपलब्धता में आ रही बाधाओं और स्थानीय जनता के भारी विरोध के चलते ये परियोजनाएं धरातल पर नहीं उतर पाई। जानकारी के मुताबिक, रुद्रप्रयाग, टिहरी, अल्मोड़ा, चमोली, कर्णप्रयाग और बनबसा समेत कुल 21 निकायों में भूमि संबंधी विवाद, पर्यावरण मंजूरी न मिलना और डीपीआर में संशोधन जैसे तकनीकी कारणों से काम शुरू नहीं हो पाया। कई जगहों पर कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए चयनित भूमि को लेकर जनता ने आंदोलन भी किए, जिसके बाद इन परियोजनाओं को बंद करना पड़ा।
बचे हुए 22.47 करोड़ से खरीदे जाएंगे वाहन
इन परियोजनाओं के बंद होने के बाद राज्य सरकार के पास 22.47 करोड़ रुपये का बजट बच गया है। शासन ने निर्णय लिया है कि इस धनराशि का उपयोग अब इन्हीं 21 नगर निकायों में घर-घर से कूड़ा उठाने वाले वाहनों की खरीद के लिए किया जाएगा। इससे शहरों की सफाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। हालांकि इस कचरे का प्रबंधन अभी भी शहरी विकास विभाग के लिए चुनौती रहेगा।
इन शहरों में बननी थीं परियोजनाएं
गजा, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, अगस्तमुनि, ऊखीमठ, शक्तिगढ़, बनबसा, लोहाघाट, कालाढूंगी, गदरपुर, पौड़ी, टिहरी, दिनेशपुर, कर्णप्रयाग, भिकियासैंण, अल्मोड़ा, चमोली, थराली, गंगोलीहाट, बेरीनाग और दुगड्डा।हमने परियोजनाएं बंद नहीं कीं। वहां जमीन, पर्यावरणीय स्वीकृति जैसी दिक्कतें आईं, जिस कारण काम नहीं हो पाया। अब वाहन खरीदने भी जरूरी हैं। 85 साइट्स पर हम कचरे के निपटारे का काम कर रहे हैं। इन छोटे निकायों के लिए क्लस्टर आधारित योजना बनाई गई है, जिससे छोटे निकायों को मिलाकर एक बड़ा समूह बनाया जाएगा। उनके लिए संयुक्त रूप से नई डीपीआर तैयार की जाएगी ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके। – विनोद गिरी गोस्वामी, निदेशक, शहरी विकास






