चारधाम यात्रा के दौरान जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग पर बढ़ती भीड़ के दबाव को देखते सात दशक पुराने वैकल्पिक मार्ग को पुनर्जीवित करने की योजना तैयार की जा रही है। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से यमुनोत्री मंदिर समिति से प्रस्ताव मांगा गया है। मानसून सीजन के बाद पुराने खरसाली-गरूड़गंगा पैदल मार्ग का लोक निर्माण विभाग की ओर से सर्वे किया जाएगा। इससे पैदल मार्ग पर लगने वाले जाम से निजात मिल पाएगी।यमुनोत्री धाम मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष प्रदीप उनियाल का कहना है कि जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग पर अब यात्रा में हर वर्ष श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। इस कारण हर दिन पैदल मार्ग पर यात्रियों का कई घंटों का जाम लग रहा है।
धाम तक पहुंचने के लिए दो मार्ग की सुविधा मिलेगी
इसके साथ ही घटना और दुघर्टना का खतरा भी बना रहता है। उन्होंने बताया कि इसके विकल्प के रूप में खरसाली-गरूड़गंगा पैदल मार्ग को पुनर्जीवित करने की मांग की गई है। उनियाल ने कहा कि 1968 से पहले इस मार्ग का प्रयोग यमुनोत्री धाम की यात्रा के लिए किया जाता था। लेकिन बाद में जानकीचट्टी से पैदल मार्ग का निर्माण होने के बाद इस मार्ग पर आवाजाही कम हो गई थी। धीरे-धीरे इस मार्ग से आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। इसलिए अगर इस मार्ग को दोबारा विकसित किया जाता है। तो इससे धाम तक पहुंचने के लिए दो मार्ग की सुविधा मिलेगी।डीएम प्रशांत आर्य ने कहा कि इस मार्ग की जानकारी स्थानीय लोगों ने दी थी। यमुनोत्री मंदिर समिति से इसके लिए प्रस्ताव मांगा गया है। मानसून सीजन के बाद लोक निर्माण विभाग से इसका सर्वे करवा कर इसको दोबारा शुरू करने की कवायद की जाएगी। साथ ही भंडेलीगाड से देवदर्शनी तक जाने वाले वैकल्पिक मार्ग का भी सुधारीकरण किया जाएगा। पैदल यात्रियों, घोड़ा-खच्चरों सहित डंडी-कंडी के लिए तीन अगल मार्ग बनाए जाएंगे।






