परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानंद सरस्वती के 73वें जन्मदिवस पर पर्यावरण सेवा महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें स्वामी चिदानंद ने अंगदान और 73 हजार पौधों का रोपण करने का संकल्प लिया। सोमवार को परमार्थ निकेतन परिवार की ओर से पर्यावरण को समर्पित कई नूतन पहलों का शुभारंभ किया गया। साथ ही दिव्यांगता मुक्त भारत, गंगा योग, गंगा कथा, परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज, मानसून कांवड़ मेला, पौधरोपण सहित पर्यावरण व मानवता को समर्पित कई योजनाओं की घोषणाएं की।
स्वामी चिदानंद ने कहा कि सबसे बड़ा दान समय दान है। महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती ने कहा कि जन्मदिवस अपने संकल्पों का उत्सव मनाने का एक अवसर होता है। इससे सभी की ऊर्जा एकत्र हो जाती है और उस ऊर्जा से संकल्प की तरफ बढ़ने में आसानी होती है।योगगुरु स्वामी रामदेव ने एकत्व, सहयोग, सामंजस्य और सद्भाव का संदेश देते हुए कहा कि जैसे हमारा शरीर एकत्व का उत्कृष्ट उदाहरण है, उसी प्रकार पूरे देश को एकत्व के साथ आगे बढ़ना होगा।कार्यक्रम के अंत में स्वामी चिदानंद ने सभी संतों और अतिथियों को इलायची व रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया। इस दौरान परमार्थ निकेतन में विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया।
ये भी हुए शामिल
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, साध्वी भगवती सरस्वती, कथाकार संत मुरलीधर, बाबा हठयोगी, कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, विनोद बागडोरिया, जूना पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, स्वामी ज्ञानानंद, महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद, सर्जन डॉ. अरविंद कुमार आदि






