Sunday, April 5, 2026
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भाजपा का संगठनात्मक संकट: क्या उत्तराखंड में सरकार नहीं संभाल पा रही एक भी चुनाव? – गरिमा मेहरा दसौनी

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देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला करते हुए प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि खुद को देश और दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहलाने वाली भाजपा आज राज्य में एक भी चुनाव संपन्न कराने में अक्षम दिखाई दे रही है।

छात्र संघ, निकाय, और पंचायत चुनाव अधर में
दसौनी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में छात्र संघ, निकाय और पंचायत चुनाव का कार्यकाल पूरा हो चुका है, लेकिन इन चुनावों को आयोजित करने में सरकार की उदासीनता साफ नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा अब अपने संगठनात्मक चुनाव तक को पीछे धकेल रही है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।

कार्यकर्ताओं की कमी या हार का डर?
दसौनी ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी ने 30 नवंबर तक बूथ समितियों के गठन का दावा किया था। ऐसे में या तो भाजपा के पास कार्यकर्ताओं की कमी हो गई है, या फिर उसे निकाय चुनाव में संभावित हार का डर सता रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि पार्टी अपनी पूरी ताकत निकाय चुनावों में झोंकना चाहती है और संगठनात्मक चुनाव इसमें बाधा बन रहे हैं।

दोहरे काम करने में असमर्थ भाजपा सरकार
गरिमा ने यह भी सवाल उठाया कि भाजपा की “ट्रिपल इंजन” सरकार एक साथ दो काम क्यों नहीं कर पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के समक्ष सरकार ने निकाय और पंचायत चुनावों में देरी के लिए जो कारण दिए, वे अविश्वसनीय हैं। कभी चार धाम यात्रा, कभी कांवड़ यात्रा, कभी लोकसभा चुनाव, और कभी आपदा का बहाना बनाकर सरकार अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश कर रही है।

पक्षपात और अन्याय के आरोप
गरिमा मेहरा दसौनी ने दावा किया कि निकाय, ग्राम पंचायत, और क्षेत्र पंचायत के चुने हुए प्रतिनिधियों को कार्यकाल विस्तार नहीं दिया गया, लेकिन खबरें हैं कि जिला पंचायत अध्यक्षों को सेवा विस्तार दिया जाएगा या प्रशासकों के रूप में नियुक्त किया जाएगा। उन्होंने इसे ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों, और जिला पंचायत सदस्यों के साथ सरासर अन्याय करार दिया।

सरकार पर अनुभवहीनता का तंज
दसौनी ने कहा कि भाजपा इतने लंबे समय तक विपक्ष में रही कि उसे सरकार चलाने का अनुभव नहीं है। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि वह अपनी कथनी और करनी में सामंजस्य बैठाए और राज्य की जनता के साथ न्याय करे।

निष्कर्ष
दसौनी ने भाजपा सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे जनता के साथ धोखा करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को यह तय करना होगा कि वह अपनी बहुमत और “ट्रिपल इंजन” सरकार की क्षमता को सही मायनों में साबित करेगी या सिर्फ नाम की सरकार बनकर रह जाएगी।

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