Friday, April 10, 2026
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इनको स्कूल कैसे पुकारें टपकती छत टूटी दीवारें

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जागेश्वर (अल्मोड़ा)। सरकारी रिकॉर्ड में यह एक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। यहां 62 छात्र-छात्राएं हर रोज खतरे के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। टपकती छतों के नीचे, दरकी हुई दीवारों के बीच भविष्य के सपने बुने जा रहे हैं। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जागेश्वर की छत वर्ष 2013 से टपकते-टपकते अब दीवारों को भी खोखला कर चुकी है। बरसात आते ही शिक्षक कक्षाओं को बरामदे में शिफ्ट करने को मजबूर हो जाते हैं। माता-पिता बार-बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन सुनवाई अब तक नहीं हुई है। इस स्कूल का हाल इतना बुरा है कि वहां कंप्यूटर और फर्नीचर को खुद शिक्षक प्लास्टिक से ढंककर बचाते हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं है। इससे सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। प्रधानाचार्य का पद भी सालों से खाली पड़ा है। सरकार की योजनाएं कागजों पर हैं मगर जमीनी हकीकत यह है कि बच्चे हर दिन जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं।

प्रधानाचार्य का पद भी खाली
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जागेश्वर प्रधानाचार्य का पद लंबे समय से खाली चल रहा है। इससे शिक्षण के साथ-साथ अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। विद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के न होने से सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। लोगों ने शीघ्र व्यवस्थाओं में सुधार करने की मांग की है।

डीएम के निर्देश के बाद भी नहीं बन सका टिनशेड
विद्यालय की बदहाली को ठीक करने के लिए कुछ समय पूर्व अभिभावकों और स्थानीय लोगों के शिष्टमंडल ने डीएम आलोक कुमार पांडे से मुलाकात की थी। डीएम ने तुरंत आपदा मद से सात लाख रुपये स्वीकृत किए थे। इसके बाद आरईएस के जेई प्रदीप बिष्ट ने विद्यालय पहुंचकर टिनशेड बनाने की बात कही थी जो अब तक नहीं बन पाया है। सवाल है कि जब तक नया भवन बनेगा तब तक बच्चों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?

इंफो
12 वर्ष से टपक रही है राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जागेश्वर की छत
62 छात्र-छात्राएं जर्जर स्कूल भवन में पढ़ने के लिए हैं मजबूर

कोट
बरसात में स्कूल की छत से पानी का टपकना आम बात हो गई है। इन भवनों का ध्वस्तीकरण कर दो नये कक्ष बनाए जा रहे हैं। – पूरन चंद्र पांडे, प्रभारी प्रधानाध्यापक
विद्यालय का ध्वस्तीकरण किया जाएगा इसके बाद नये कमरों का निर्माण किया जाएगा। विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को कोई दिक्कत न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। – अत्रेश स्याना , सीईओ अल्मोड़ा