Friday, April 10, 2026
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स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती हकीकत: टॉर्च की रोशनी में इलाज, एम्स में फैकल्टी की भारी कमी

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देहरादून। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा द्वारा एम्स ऋषिकेश के दीक्षांत समारोह के दौरान उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना किए जाने पर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन व प्रशासन) सूर्यकांत धस्माना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के बयानों को खोखला और जमीनी हकीकत से परे बताया।

श्री धस्माना ने कहा कि यदि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं इतनी ही उत्कृष्ट होतीं, तो दो महीने पूर्व पौड़ी जनपद मुख्यालय में हुई बस दुर्घटना के घायलों को जिला अस्पताल में टॉर्च की रोशनी में प्राथमिक उपचार न करना पड़ता। उन्होंने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वास्थ्य मंत्री श्री धन सिंह रावत के गृह जनपद में यह घटना हुई और वहां घायलों को आवश्यक सुविधाएं न मिलने के कारण उन्हें उच्चतर चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ा।

उन्होंने एम्स ऋषिकेश की स्थिति पर भी सवाल उठाए। श्री धस्माना ने बताया कि जिस संस्थान में केंद्रीय मंत्री डिग्रियां बांट रहे हैं, वहां लगभग 39 प्रतिशत फैकल्टी पद खाली हैं। डॉक्टरों की भारी कमी के चलते मरीजों को भर्ती करने में भी हिचकिचाहट बरती जाती है। यह स्थिति केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि देश की राजधानी दिल्ली स्थित एम्स में भी 39 प्रतिशत फैकल्टी पद रिक्त हैं, जबकि देश के सभी एम्स संस्थानों में औसतन 40 प्रतिशत पद खाली हैं, जिसे स्वयं केंद्र सरकार संसद में स्वीकार कर चुकी है।

श्री धस्माना ने कहा, “बड़ी-बड़ी इमारतें बनवाने और आंकड़ों से खेल करने से इलाज नहीं होता। स्वास्थ्य सेवाएं तभी सशक्त बन सकती हैं जब पर्याप्त डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और उपकरणों की उपलब्धता हो।”

उन्होंने केंद्रीय मंत्री द्वारा दीक्षांत समारोह जैसे गरिमामयी अवसर पर स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति को केवल पिछले 11 वर्षों की देन बताने को राजनीति से प्रेरित और हास्यास्पद करार दिया।

अंत में श्री धस्माना ने कहा कि प्रदेश की जनता अब जमीनी सच्चाई को समझ चुकी है और खोखले दावों से प्रभावित नहीं होने वाली।

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