देहरादून। रेशम विभाग करीब ढाई दशक के बाद शहतूत की प्रजाति बदलेगा। जो नई प्रजाति लगाने की योजना है, उससे अधिक शहतूत की पत्तियों का उत्पादन होगा, जिसका लाभ अधिक लाभ कोकून (रेशम उत्पादन) तैयार होने में मिलेगा।राज्य में रेशम विभाग के 72 फार्म स्थित हैं, यहां पर शहतूत की प्रजातियों को लगाया गया है। रेशम विभाग करीब ढाई दशक इस प्रजाति को बदलने की योजना बनाई है। निदेशक प्रदीप कुमार बताते हैं कि शहतूत की पत्तियों को रेशम कीट खाता है, जिससे कोकून तैयार होता है। अधिक शहतूत की पत्तियों की अधिक उपलब्धता होगी, तो उससे सीधे तौर पर रेशम उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ेगा। जो नई प्रजाति का चयन किया गया है, उससे मौजूदा प्रजाति की तुलना में करीब डेढ़ गुना तक अधिक पत्ती तैयार होती है। अब सभी फार्म पर चरणबद्ध तरीके शहतूत की नई प्रजाति को लगाने का कार्य शुरू होगा। इसमें चयनित फार्म हिस्से में फिर अगले साल आधे हिस्से में बदलाव किया जाएगा। इसके साथ ही नई प्रजाति को नर्सरी में तैयार कर किसानों को भी उपलब्ध कराया जाएगा।






