Tuesday, April 28, 2026
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पाकिस्तान में ऊर्जा संकट पेट्रोलियम मंत्री परवेज मलिक ने कबूली लाचारी सिर्फ 5-7 दिनों का कच्चा तेल शेष

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पड़ोसी देश पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ा है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने चेताया है कि देश के पास अब केवल पांच से सात दिनों का कच्चा तेल शेष बचा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और लाल सागर में उपजे संकट ने पाकिस्तान की आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह तोड़ दिया है। यदि अगले कुछ दिनों में तेल की नई खेप नहीं पहुंचती है, तो देश में परिवहन और उद्योग पूरी तरह ठप हो सकते हैं।

मंत्री मलिक ने जाहिर की बेबसी
मंत्री मलिक ने भारत की रणनीतिक क्षमता का जिक्र करते हुए अपनी बेबसी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास कोई ठोस ऑयल रिजर्व नहीं है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि हम भारत की तरह सक्षम नहीं हैं। भारत एक सिग्नेचर करके अपने रिजर्व से 60-70 दिनों का तेल रिलीज कर सकता है। लेकिन पाकिस्तान की स्थिति ऐसी है कि यहां बाहरी झटकों को सहने की रत्ती भर भी क्षमता नहीं बची है।

एक दिन का भी अतिरिक्त पेट्रोल भंडार नहीं- अली परवेज मलिक
पेट्रोलियम मंत्री ने यह भी कहा कि देश के पास एक दिन का भी अतिरिक्त पेट्रोल भंडार नहीं है। उन्होंने ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को इस संकट की मुख्य वजह बताया। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी यह युद्ध थमता नहीं दिख रहा है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को तत्काल एक प्रभावी ऊर्जा सुरक्षा योजना की आवश्यकता है, अन्यथा देश पूरी तरह ठप हो सकता है।दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने पाकिस्तान की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ कर दिया है कि वे रूसी और ईरानी तेल पर दी गई छूट की अवधि को आगे नहीं बढ़ाएंगे। बेसेंट ने कहा कि ईरान के लिए अब कोई रियायत नहीं होगी। अमेरिका ने प्रभावी रूप से नाकाबंदी कर रखी है, जिससे ईरानी तेल की आपूर्ति रुक गई है। रूस से तेल खरीद पर मिलने वाली छूट भी खत्म होने वाली है।

रिफाइनरियों के बंद होने का खतरा
इन वैश्विक प्रतिबंधों और घरेलू भंडारण की कमी ने पाकिस्तान को दोतरफा संकट में फंसा दिया है। कच्चे तेल की कमी से रिफाइनरियों के बंद होने का खतरा है। यदि जल्द ही आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो पाकिस्तान में परिवहन और बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है। सरकार अब भंडारण क्षमता को मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण यह राह बेहद कठिन नजर आ रही है।