भृगुखाल रेंज में पिछले चार दिनों से लगी भीषण आग ने वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचाया है। आग की चपेट में आकर करीब 50 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर राख हो गया है, जिसमें सबसे अधिक क्षति साल के घने जंगलों को हुई है। लगातार फैल रही इस आग से वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है।शुक्रवार को दिनभर भृगुखाल और आसपास के इलाकों में आग के कारण आसमान धुएं से ढका रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात के समय भी आग की लपटें जंगलों में फैलती रहीं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
न्याय पंचायत बड़यूंन के अंतर्गत आने वाले ग्वाड़ी, लमखेत, निशनी, तुन्ना, बड़यूंन और नालीखाल क्षेत्रों में आग लगातार धधक रही है। ग्रामीण राजीव ने बताया कि पिछले चार दिनों से जंगलों में आग लगी हुई है, लेकिन अब तक उस पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है।हैरानी की बात यह है कि वन विभाग के अधिकारी आग पर नियंत्रण पाने का दावा कर रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। आग पर काबू पाने में हो रही देरी ने विभाग की तैयारियों और दावों की पोल खोल दी है।वनाग्नि के कारण न केवल बहुमूल्य वन संपदा नष्ट हो रही है, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता पर भी गहरा असर पड़ रहा है। वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट होने से उनके पलायन और जान-माल के नुकसान की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से जल्द प्रभावी कार्रवाई कर आग पर काबू पाने की मांग की है, ताकि और अधिक नुकसान को रोका जा सके।
उच्चाधिकारियों को नहीं है जानकारी
जंगलों में अभी कहां आग लगी हुई है, इस बात की जानकारी वन विभाग के उच्चाधिकारियों को नहीं है। इससे स्पष्ट होता है कि फील्ड के कर्मचारी उच्चाधिकारियों को सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। डीएफओ स्पर्श काला ने बताया कि इस संबंध में जानकारी जुटाई जाएगी।भृगुखाल रेंज अंतर्गत सभी स्थानों पर आग पर काबू पा लिया गया है। अब रेंज के किसी भी क्षेत्र में आग नहीं है। – अनिल देवलाल, वन क्षेत्राधिकारी भृगुखाल






