राज्य सूचना आयुक्त कुशला नंद ने एक मामले की सुनवाई के दौरान माना कि किसी आवेदक को कोई सूचना उपलब्ध कराने के लिए मूल दस्तावेज की प्रतिलिपि बनाने के लिए निर्धारित शुल्क देना नियमों के अनुसार सही है। उन्होंने कहा कि सूचना अधिकारी केवल अपने अधिकार क्षेत्र की जानकारी देने के लिए बाध्य है। उससे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि जो सूचना उसके अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आती, वह उसे एकत्र कर आवेदक को उपलब्ध कराएगा। सूचना के अधिकार के अंतर्गत मांगी गई जानकारी आवेदनकर्ताओं को निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। सूचना का आवेदन करने के लिए आवेदक को केवल दस रुपये की फीस देनी होती है लेकिन यदि मांगी गई सूचना अधिक लंबी है तो इसके लिए आवेदक को अतिरिक्त फीस का भुगतान करना होगा।
क्या था पूरा मामला
सूचना के अधिकार के अंतर्गत आवेदक मुकेश कुमार ने उत्तराखंड सिंचाई विभाग द्वारा जारी एक टेंडर, इसके अंतर्गत हुए कार्य और इसके निरीक्षण से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी थी। सूचना अधिकारी ने 2926 पृष्ठों की जानकारी देने के लिए आवेदक से 5851 रुपये की फीस की मांग की थी। यह सूचना नियमों के अनुसार प्रतिलिपि बनाने की लागत होती है जो आवेदक को वहन करनी होती है। मुकेश कुमार ने इसके विरोध में प्रथम और बाद में द्वितीय अपील दाखिल किया था। उक्त मामले में राज्य सूचना आयुक्त ने आवेदक को 50 पृष्ठों की जानकारी मुफ्त में देने की अनुशंसा की। इससे अधिक जानकारी की मांग होने पर आवेदक को अतिरिक्त धनराशि का भुगतान करना होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि आवेदक चाहे तो संबंधित कार्यालय पहुंचकर मूल दस्तावेजों को स्वयं देखने के लिए स्वतंत्र है।






