पिछले वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पूरा देश गुस्से से उबल पड़ा था। इस घटना के बाद भारतीय सेना ने 7-8 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया जिसमें सौ से अधिक आतंकियों के मारे जाने का अनुमान है। इस ऑपरेशन के समय देहरादून सहित पूरा उत्तराखंड हाई अलर्ट पर था। सेना के जवान पाकिस्तान की तरफ से होने वाले किसी भी प्रतिक्रिया का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार थे। पहलगाम हमले के बाद राजनीतिक शीर्ष की तरफ से स्पष्ट संकेत दे दिए गए थे कि इस हमले का कड़ा जवाब दिया जाना है। इसके लिए सेना को कार्रवाई करने की खुली छूट दी गई थी। सेना को हमला करने का तरीका, तीव्रता और समय चुनने की भी छूट थी। सेना ने इस हमले के लिए एक अभ्यास किया था। देहरादून में हुए इस अभ्यास में सेना के तीनों अंगों ने हिस्सा लिया था। इसका उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर के सीमित युद्ध के बाद पाकिस्तान या उसका समर्थन करने वाले किसी देश के द्वारा कोई बड़ी कार्रवाई किए जाने पर उसका कड़ा जवाब देना था। देहरादून में सैनिकों को सूचना के बाद तुरंत हमला करने के लिए तैयार रहने के लिए को कहा गया था।
हमले की बरसी पर सेना ने किया ट्वीट
आम नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए सीमा से सटे इलाकों को भी पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया था। हालांकि, पाकिस्तान ने अपनी नाजुक स्थिति को भांपते हुए प्रतिक्रिया देने की बजाय युद्ध शांति की अपील की जिसे भारतीय सेना ने स्वीकार कर लिया। इस हमले की बरसी पर सेना ने एक ट्वीट कर कहा है कि भारत भूलता नहीं है। सेना ने इस हमले के बाद किए गए ऑपरेशन सिंदूर को भी याद किया है। सेना के इस ट्वीट को पाकिस्तान को दिए गए एक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। संदेश साफ है, यदि पाकिस्तान फिर कभी इस तरह का हमला करने की सोचता है तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।






