Wednesday, April 15, 2026
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ग्रामीणों ने खोला मोर्चा सरकार को दी चेतावनी रामनगर पटरानी गांव में स्कूल शिफ्टिंग का विरोध

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रामनगर। उत्तराखंड के रामनगर के वन ग्राम पटरानी में एक भारी तनाव का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हाई स्कूल को दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित करने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया. मंगलवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने पटरानी में सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सांकेतिक धरना दिया। यह प्रदर्शन ग्राम पटरानी के ग्रामीण और मालिकाना हक संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। ग्रामीणों ने हंगामेदार बैठक में सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वन ग्राम पटरानी के निवासियों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि उनके मूलभूत अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने बताया ग्राम पटरानी में स्थित एकमात्र हाई स्कूल में न केवल गांव के बच्चे बल्कि आसपास के अन्य कई ग्रामीण इलाके के बच्चे भी पढ़ाई के लिए आते हैं। सरकार ने अचानक आदेश जारी कर दिया है कि यह स्कूल बंद कर दिया जाएगा। इसे करीब 6 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय इंटर कॉलेज मालधनचौड में शामिल किया जाएगा।

ग्रामीणों ने कहा यह निर्णय अत्यंत गलत और अन्यायपूर्ण है. उन्होंने कहा गांव जंगल से घिरा हुआ है। दिनभर वन्य जीवों का आना-जाना लगा रहता है। जिससे पहले भी कई ग्रामीण वन्य जीवों के हमले का शिकार हो चुके हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार बसों की व्यवस्था का आश्वासन तो देती है, लेकिन आज तक गांव में 108 एंबुलेंस तथा गैस वाहन जैसी जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिलीं.ग्रामीणों ने कहा बरसात के मौसम में आसपास के नाले उफान पर आ जाते हैं। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजना असंभव हो जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बच्चों को शिक्षा से वंचित करने का षड्यंत्र रच रही है। इसलिए वे इस फैसले को नहीं मानेंगे। यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो व्यापक स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी भेजा है। जिसमें इस फैसले को वापस लेने की मांग की गई है। मालिकाना हक संघर्ष समिति के अध्यक्ष एस लाल ने कहा हम सरकार से न्याय की मांग करते है। यह फैसला हमारी पीढ़ियों की मेहनत को नष्ट करने के समान है। हम अपना हक प्राप्त करने के लिए मजबूती से लड़ेंगे। गांव म मनोनीत ग्राम प्रधान बसंत बरत्रियाल ने कहा, यह केवल शिक्षा का मामला नहीं है, यह हमारे अस्तित्व का सवाल है। बच्चों को सुरक्षित शिक्षा मिलना हमारा संवैधानिक अधिकार है। हम अपनी आवाज उठाएंगे।