विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नितिन पांडेय की अदालत ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में बाल अपचारी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही जुर्माने की आधी धनराशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया गया है। मामले में यह फैसला घटना के करीब 28 महीने बाद आया।अभियोजन पक्ष के अनुसार, जैतपुरा थाना क्षेत्र निवासी महिला ने जनवरी 2024 में अपनी 15 वर्षीय बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़िता की मां का आरोप था कि पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति का नाबालिग साला उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया। घटना 23 जनवरी 2024 की बताई गई, जब सुबह करीब तीन बजे किशोरी घर से गायब मिली। काफी खोजबीन के बाद परिजनों ने पुलिस से शिकायत की थी।
कोर्ट ने सुनाया फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और कुछ ही समय बाद आरोपी बाल अपचारी को हिरासत में ले लिया। इसके बाद उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया। पुलिस ने किशोरी को भी बरामद कर मेडिकल परीक्षण कराया, जिसमें उसके साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने बाल अपचारी को दोषी माना। विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह ने बताया कि अदालत ने आरोपी को गंभीर अपराध का दोषी मानते हुए सख्त सजा सुनाई है। हालांकि आरोपी नाबालिग है, इसलिए उसे बाल अपचारी के रूप में ही सजा भुगतनी होगी और उसे बाल सुधार गृह में रखा जाएगा। अदालत के फैसले को पीड़िता पक्ष के लिए महत्वपूर्ण न्याय माना जा रहा है।






